श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.22.58 
বস্তু-বিচারেতে সেহ অপরাধ নহে
তথাপিহ ঽঅপরাধঽ করিঽ প্রভু কহে
वस्तु-विचारेते सेह अपराध नहे
तथापिह ऽअपराधऽ करिऽ प्रभु कहे
 
 
अनुवाद
वास्तव में यह कोई अपराध भी नहीं था, फिर भी प्रभु ने इसे अपराध माना।
 
In fact, it was not even a crime, yet the Lord considered it a crime.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)