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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
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श्लोक 56
श्लोक
2.22.56
ইহা না মানিযা যে সুজন-নিন্দা করে
জন্মে জন্মে সে পাপিষ্ঠ দৈব-দোষে মরে
इहा ना मानिया ये सुजन-निन्दा करे
जन्मे जन्मे से पापिष्ठ दैव-दोषे मरे
अनुवाद
जो पापी लोग इस तथ्य की अनदेखी करते हैं और भक्तों की निंदा करते हैं, वे जन्म-जन्मान्तर तक ईश्वर की सजा भुगतते हैं।
Those sinful people who ignore this fact and criticize the devotees suffer God's punishment for many lives.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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