vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
»
श्लोक 55
श्लोक
2.22.55
শূলপাণি-সম যদি বৈষ্ণবেরে নিন্দে
তথাপিহ নাশ পায,—কহে শাস্ত্র-বৃন্দে
शूलपाणि-सम यदि वैष्णवेरे निन्दे
तथापिह नाश पाय,—कहे शास्त्र-वृन्दे
अनुवाद
भगवान शिव के स्तर का कोई भी व्यक्ति यदि किसी भक्त की निन्दा करे, तो उसका शीघ्र ही नाश हो जाएगा। यह सभी शास्त्रों का निर्णय है।
Anyone of Lord Shiva's stature who slanders a devotee will soon be destroyed. This is the verdict of all the scriptures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×