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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
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श्लोक 53
श्लोक
2.22.53
শ্রী-মুখের অনুগ্রহ শুনিযা বচন
“জয-জয-হরিঽ ধ্বনি হৈল তখন
श्री-मुखेर अनुग्रह शुनिया वचन
“जय-जय-हरिऽ ध्वनि हैल तखन
अनुवाद
जब भक्तों ने भगवान के मुख से वे करुणामय शब्द सुने, तो वे सब बोले, “जय! जय! भगवान हरि की जय हो!”
When the devotees heard those compassionate words from the Lord's mouth, they all chanted, "Victory! Victory! Victory to Lord Hari!"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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