श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.22.52 
“এখনে সে বিষ্ণু-ভক্তি হৈল তোমার
অদ্বৈতের স্থানে অপরাধ নাহি আর”
“एखने से विष्णु-भक्ति हैल तोमार
अद्वैतेर स्थाने अपराध नाहि आर”
 
 
अनुवाद
"अब तुम्हें विष्णु की भक्ति प्राप्त हो गई है। अब तुम अद्वैत के अपराध से मुक्त हो।"
 
"Now you have attained devotion to Vishnu. Now you are free from the sin of Advaita."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)