श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.22.50 
দোঙ্হার প্রভাবে দোঙ্হে হৈলা বিহ্বল
ঽহরি হরিঽ ধ্বনি করে বৈষ্ণব-মণ্ডল
दोङ्हार प्रभावे दोङ्हे हैला विह्वल
ऽहरि हरिऽ ध्वनि करे वैष्णव-मण्डल
 
 
अनुवाद
वे दोनों एक दूसरे के प्रभाव से अभिभूत हो गये और वहाँ एकत्रित सभी वैष्णवों ने भगवान हरि का नाम जपना आरम्भ कर दिया।
 
Both of them were overwhelmed by each other's influence and all the Vaishnavas gathered there started chanting the name of Lord Hari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)