श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.22.5 
দেবানন্দ পণ্ডিত চলিল নিজ-বাসে
দুঃখ পাইলেন দ্বিজ দুষ্ট-সঙ্গ-দোষে
देवानन्द पण्डित चलिल निज-वासे
दुःख पाइलेन द्विज दुष्ट-सङ्ग-दोषे
 
 
अनुवाद
देवानंद पंडित भी अपने घर लौट आए। बुरी संगति के कारण उन्हें दुःख हो रहा था।
 
Devananda Pandit also returned home, suffering from bad company.
तात्पर्य
मटेरियलिस्टिक विद्यार्थियों से संगति रखने की भूल के कारण देवानंद पंडित को महाप्रभु की शिक्षा मिली और इसलिए वह दुखी हुए। हालाँकि आम लोग उन्हें एक संयमी व्यक्ति मानते थे, लेकिन उन्हें श्री चैतन्यदेव से कोई सम्मान नहीं मिला। चूँकि श्री महाप्रभु ने देवानंद को "भागवत" के रूप में स्वीकार नहीं किया, इसलिए उन्हें भगवान की कृपा का पात्र नहीं माना जा सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)