श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.22.48 
“জয জয হরি” বলে বৈষ্ণব-সকল
অন্যোন্যে করযে শ্রী-চৈতন্য-কোলাহল
“जय जय हरि” बले वैष्णव-सकल
अन्योन्ये करये श्री-चैतन्य-कोलाहल
 
 
अनुवाद
सभी वैष्णवों ने जयघोष किया, “भगवान हरि की जय हो!” तब उनके बीच भगवान चैतन्य की कोलाहलपूर्ण स्तुति गूंज उठी।
 
All the Vaishnavas shouted, “Victory to Lord Hari!” Then a tumultuous praise of Lord Chaitanya resounded among them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)