vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
»
श्लोक 48
श्लोक
2.22.48
“জয জয হরি” বলে বৈষ্ণব-সকল
অন্যোন্যে করযে শ্রী-চৈতন্য-কোলাহল
“जय जय हरि” बले वैष्णव-सकल
अन्योन्ये करये श्री-चैतन्य-कोलाहल
अनुवाद
सभी वैष्णवों ने जयघोष किया, “भगवान हरि की जय हो!” तब उनके बीच भगवान चैतन्य की कोलाहलपूर्ण स्तुति गूंज उठी।
All the Vaishnavas shouted, “Victory to Lord Hari!” Then a tumultuous praise of Lord Chaitanya resounded among them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×