श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  2.22.45 
বুঝিযা সময আই আইল বাহিরে
আচার্য-চরণ-ধূলি লৈলেন শিরে
बुझिया समय आइ आइल बाहिरे
आचार्य-चरण-धूलि लैलेन शिरे
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि उनका अवसर आ गया है, माता शची आगे आईं और अद्वैत के चरणों की धूल अपने सिर पर ले ली।
 
Knowing that her opportunity had come, Mother Shachi came forward and took the dust from Advaita's feet on her head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)