श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  2.22.44 
কহিতে আইর তত্ত্ব আচার্য-গোসাঞি
পডিলা আবিষ্ট হৈযা, বাহ্য কিছু নাই
कहिते आइर तत्त्व आचार्य-गोसाञि
पडिला आविष्ट हैया, बाह्य किछु नाइ
 
 
अनुवाद
माता शची की महिमा का वर्णन करते समय आचार्य गोसाणी अभिभूत हो गए और बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े।
 
While describing the glory of Mother Shachi, Acharya Gosani became overwhelmed and fell unconscious on the ground.
तात्पर्य
शचीदेवी के बारे में कहते हुए, अद्वैत प्रभु ने बाह्य चेतना खो दी और कहा, "आदरणीय माता शची और गंगा एक हैं। वह देवकी और यशोदा से अलग नहीं हैं।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)