श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.22.41 
বিষ্ণু-ভক্তি-স্বরূপিণীআই জগন্-মাতাতো
মরা বা মুখে কেনে আনঽ হেন কথা
विष्णु-भक्ति-स्वरूपिणीआइ जगन्-मातातो
मरा वा मुखे केने आनऽ हेन कथा
 
 
अनुवाद
"वह ब्रह्माण्ड की माता हैं और भगवान विष्णु की भक्ति का साक्षात् स्वरूप हैं। आप ऐसी बातें कैसे कह सकते हैं?"
 
"She is the mother of the universe and the very embodiment of devotion to Lord Vishnu. How can you say such things?"
तात्पर्य
पवित्रतम माता शची साक्षात भक्ति की मूर्ति हैं, इसलिए ऐसे उतावले शब्द बोलना अनुचित है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)