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श्लोक 2.22.40  |
যে আইর চরণ-ধূলির আমি পাত্র
সে আইর প্রভাব না জানি তিল-মাত্র |
ये आइर चरण-धूलिर आमि पात्र
से आइर प्रभाव ना जानि तिल-मात्र |
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| अनुवाद |
| "मैं उस माँ के चरणों की धूल का आकांक्षी हूँ। मैं उसकी महिमा का तनिक भी ज्ञान नहीं रखता।" |
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| "I aspire for the dust of the feet of that Mother. I have no knowledge of her glory." |
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