श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.22.37 
তখনে চলিলা সবে অদ্বৈতের স্থানে
অদ্বৈতেরে কহিলেক সব বিবরণে
तखने चलिला सबे अद्वैतेर स्थाने
अद्वैतेरे कहिलेक सब विवरणे
 
 
अनुवाद
इसके बाद सभी भक्त अद्वैत के पास गए और उन्हें सब कुछ विस्तार से समझाया।
 
After this all the devotees went to Advaita and explained everything to him in detail.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)