श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.22.35 
নাডার স্থানেতে আছে তান অপরাধ
নাডা ক্ষমিলেই হয প্রেমের প্রসাদ
नाडार स्थानेते आछे तान अपराध
नाडा क्षमिलेइ हय प्रेमेर प्रसाद
 
 
अनुवाद
“उसने नाडा को नाराज किया है, इसलिए वह परमानंद प्रेम तभी प्राप्त कर सकती है जब नाडा उसे क्षमा कर दे।
 
“She has offended Nada, so she can attain ecstatic love only if Nada forgives her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)