श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.22.34 
দুর্বাসার অপরাধ অম্বরীষ-স্থানে
তুমি জান, তার ক্ষয হৈল কেমনে
दुर्वासार अपराध अम्बरीष-स्थाने
तुमि जान, तार क्षय हैल केमने
 
 
अनुवाद
“आप जानते हैं कि दुर्वासा द्वारा अम्बरीष के प्रति किया गया अपराध किस प्रकार निष्फल हो गया।
 
“You know how the crime committed by Durvasa against Ambarisha proved futile.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)