श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.22.32 
প্রভু বলে,—“উপদেশ কহিতে সে পারি
বৈষ্ণবাপরাধ আমি খণ্ডাইতে নারি
प्रभु बले,—“उपदेश कहिते से पारि
वैष्णवापराध आमि खण्डाइते नारि
 
 
अनुवाद
भगवान ने उत्तर दिया, "मैं निर्देश तो दे सकता हूँ, किन्तु मैं वैष्णव के प्रति किये गये अपराध को नष्ट करने में असमर्थ हूँ।
 
The Lord replied, “I can give instructions, but I am unable to destroy the offense committed against a Vaishnava.
तात्पर्य
"ये सच है कि मैं सबको भक्ति मार्ग की शिक्षा दे सकता हूँ, लेकिन जिसने ईर्ष्यावश वैष्णव का अपराध किया हो, मैं उन्हें कभी नहीं उबार पाता।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)