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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
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श्लोक 30
श्लोक
2.22.30
তুমি যাঙ্র পুত্র প্রভু,—সে
সর্ব-জননীপুত্র-স্থানে মাযের কি অপরাধ গণি
तुमि याङ्र पुत्र प्रभु,—से
सर्व-जननीपुत्र-स्थाने मायेर कि अपराध गणि
अनुवाद
हे प्रभु, आप उसके पुत्र हैं, इसलिए वह सबकी माता है। क्या पुत्र अपनी माता के अपराध पर विचार कर सकता है?
O Lord, you are her Son, so she is the mother of all. Can a son consider his mother's sins?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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