श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.22.27 
মহাবক্তাশ্রীনিবাস বলে আর বার
“এ কথায প্রভু, দেহ-ত্যাগ সে সবার
महावक्ताश्रीनिवास बले आर बार
“ए कथाय प्रभु, देह-त्याग से सबार
 
 
अनुवाद
वाक्चातुर्य से युक्त श्रीवास ने पुनः कहा, “हे प्रभु, ये शब्द हमें अपना शरीर त्यागने पर विवश कर देंगे।
 
Endowed with eloquence, Srivasa again said, “O Lord, these words will compel us to give up our bodies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)