श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.22.20 
ভক্তি-যোগ বিলায গৌরাঙ্গ-মহেশ্বর
যাঙ্হার যাহাতে প্রীতি, লয সেই বর
भक्ति-योग विलाय गौराङ्ग-महेश्वर
याङ्हार याहाते प्रीति, लय सेइ वर
 
 
अनुवाद
जब भगवान गौरांग ने शुद्ध भक्ति सेवा वितरित की, तो भक्तों ने अपनी इच्छाओं के अनुसार वरदान मांगे।
 
When Lord Gauranga distributed pure devotional service, the devotees asked for boons according to their desires.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)