श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  2.22.19 
বাম-দিকে গদাধর তাম্বূল যোগায
চারি-দিকে ভক্ত-গণ চামর ঢুলায
वाम-दिके गदाधर ताम्बूल योगाय
चारि-दिके भक्त-गण चामर ढुलाय
 
 
अनुवाद
भगवान के बाईं ओर से गदाधर ने पान-सुपारी चढ़ाई। चारों ओर भक्तों ने भगवान को चामर से पंखा झलना शुरू कर दिया।
 
Gadadhara, from the Lord's left, offered betel nut and betel leaf. Devotees all around began fanning the Lord with chamars.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)