श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.22.18 
দেখিঽ মহাপরকাশ নিত্যানন্দ-রায
তত-ক্ষণে তুলিঽ ছত্র ধরিল মাথায
देखिऽ महापरकाश नित्यानन्द-राय
तत-क्षणे तुलिऽ छत्र धरिल माथाय
 
 
अनुवाद
भगवान के दिव्य स्वरूप को देखकर नित्यानंद प्रभु ने तुरन्त भगवान के सिर पर छत्र धारण कर लिया।
 
Seeing the divine form of the Lord, Nityananda Prabhu immediately placed an umbrella over the Lord's head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)