श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.22.17 
প্রেম-ভক্তি বিলাইতে আমার প্রকাশ
মাগ মাগ আরে নাডা, মাগ শ্রীনিবাস”
प्रेम-भक्ति विलाइते आमार प्रकाश
माग माग आरे नाडा, माग श्रीनिवास”
 
 
अनुवाद
"मैं भगवान का आनंदमय प्रेम बाँटने के लिए अवतरित हुआ हूँ। हे नादा! हे श्रीनिवास! कुछ वरदान माँगिए!"
 
"I have incarnated to share the blissful love of the Lord. O Nada! O Srinivasa! Ask for some boons!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)