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श्लोक 2.22.16  |
শুতিযা আছিলুঙ্ ক্ষীর-সাগর-ভিতরে
মোর নিদ্রা ভাঙ্গিলেক নাডার হুঙ্কারে |
शुतिया आछिलुङ् क्षीर-सागर-भितरे
मोर निद्रा भाङ्गिलेक नाडार हुङ्कारे |
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| अनुवाद |
| मैं क्षीरसागर में सो रहा था, किन्तु अद्वैत की तीव्र पुकार से मेरी नींद टूट गयी। |
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| I was sleeping in the Kshirsagar, but my sleep was broken by the loud call of Advaita. |
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