जो व्यक्ति नित्यानंद प्रभु की शरण को त्याग देता है, उसे जीवन में कभी भी सुख प्राप्त नहीं होता।
The person who abandons the shelter of Nityananda Prabhu never gets happiness in life.
तात्पर्य
श्री नित्यानंद प्रभु गौड़ देश के अधिष्ठात्रिक देव हैं। उनक्री कृपा के बिना कोई भी श्री चैतन्य के कमल चरणों के शरण में नहीं आ सकता। यदि जीव श्री नित्यानंद की कृपा से वंचित रह जाता है तो वह कभी भी जीवन में सुख नहीं प्राप्त कर सकता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥