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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
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श्लोक 143
श्लोक
2.22.143
গৌড-দেশ ইন্দ্র জয নিত্যানন্দ-রায
কে পায চৈতন্য বিনে তোমার কৃপায?
गौड-देश इन्द्र जय नित्यानन्द-राय
के पाय चैतन्य विने तोमार कृपाय?
अनुवाद
गौड़देश [बंगाल] के स्वामी नित्यानंद राय की जय हो! आपकी कृपा के बिना भगवान चैतन्य को कौन प्राप्त कर सकता है?
All hail Swami Nityananda Raya of Gauradesh [Bengal]! Who can attain Lord Chaitanya without your grace?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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