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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
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श्लोक 142
श्लोक
2.22.142
জয নিত্যানন্দ-গৌরচন্দ্রের শরণ
জয জয নিত্যানন্দ সহস্র-বদন
जय नित्यानन्द-गौरचन्द्रेर शरण
जय जय नित्यानन्द सहस्र-वदन
अनुवाद
भगवान गौरचन्द्र की शरण में आये नित्यानंद की जय हो! अनंत रूप में हजारों सिरों वाले नित्यानंद की जय हो!
Victory to Nityananda, who has taken refuge in Lord Gaurachandra! Victory to Nityananda, who has thousands of heads and is infinite in form!
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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