श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  2.22.139 
অল্প ভাগ্যে নাহি হয নিত্যানন্দ দাস
যাহারা লওযায গৌরচন্দ্রের প্রকাশ
अल्प भाग्ये नाहि हय नित्यानन्द दास
याहारा लओयाय गौरचन्द्रेर प्रकाश
 
 
अनुवाद
कम भाग्यशाली लोग भगवान नित्यानन्द के सेवक नहीं बन पाते, जिनकी कृपा से भगवान गौरचन्द्र को समझा जा सकता है।
 
Those less fortunate are unable to become servants of Lord Nityananda, by whose grace Lord Gaurachandra can be understood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)