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श्लोक 2.22.138  |
নিত্যানন্দ-ভক্ত সব-দিকে সাবধান
নিত্যানন্দ-ভৃত্যের ঽচৈতন্যঽ—ধন-প্রাণ |
नित्यानन्द-भक्त सब-दिके सावधान
नित्यानन्द-भृत्येर ऽचैतन्यऽ—धन-प्राण |
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| अनुवाद |
| नित्यानंद के भक्त सदैव सावधान रहते हैं। नित्यानंद प्रभु के वे सेवक केवल भगवान चैतन्य को ही अपना जीवन और धन मानते हैं। |
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| Nityananda's devotees are always vigilant. Those servants of Nityananda Prabhu consider Lord Chaitanya alone as their life and wealth. |
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