श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 137
 
 
श्लोक  2.22.137 
নিন্দা নাহি নিত্যানন্দ-সেবকের মুখে
অহর্নিশ চৈতন্যের যশ গায সুখে
निन्दा नाहि नित्यानन्द-सेवकेर मुखे
अहर्निश चैतन्येर यश गाय सुखे
 
 
अनुवाद
नित्यानंद के सेवक कभी भी ईशनिंदा नहीं करते। वे दिन-रात आनंदपूर्वक भगवान चैतन्य की महिमा का गान करते हैं।
 
Nityananda's servants never blaspheme. They joyfully sing the glories of Lord Chaitanya day and night.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)