श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  2.22.134 
নিত্যানন্দ-স্বরূপে সে নিষ্কপট হঞা
কহিলেন গৌরচন্দ্র ঽঈশ্বরঽ করিযা
नित्यानन्द-स्वरूपे से निष्कपट हञा
कहिलेन गौरचन्द्र ऽईश्वरऽ करिया
 
 
अनुवाद
बिना किसी शर्त के भगवान गौरचन्द्र ने नित्यानंद स्वरूप को “ईश्वर” अर्थात परम भगवान कहकर संबोधित किया।
 
Without any conditions, Lord Gaurachandra addressed Nityananda Swarupa as “Ishwar” meaning the Supreme Lord.
तात्पर्य
श्री आदवैत प्रभु श्री गौरसुंदर के सेवक थे। श्री गौरसुंदर ने श्री नित्यानंद प्रभु को “ईश्वर” कहा है। जो लोग आदवैत प्रभु को “कृष्ण” बताते हैं, वे निश्चित रूप से श्री नित्यानंद प्रभु से ईर्ष्या करते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)