श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  2.22.129 
বৈষ্ণব-নিন্দক-গণ যাহার আশ্রয
আপনেই এডাইতে তাহার সṁশয
वैष्णव-निन्दक-गण याहार आश्रय
आपनेइ एडाइते ताहार सꣳशय
 
 
अनुवाद
यहाँ तक कि उस व्यक्ति का भी उद्धार संदिग्ध है जिसके अनुयायी वैष्णवों की निन्दा करते हैं।
 
Even the salvation of a person whose followers slander Vaishnavas is doubtful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)