श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  2.22.127 
অতএব দণ্ড দেখাইযা জননীরে
সাক্ষী করিলেন অদ্বৈতাদি-বৈষ্ণবেরে
अतएव दण्ड देखाइया जननीरे
साक्षी करिलेन अद्वैतादि-वैष्णवेरे
 
 
अनुवाद
इसलिए उन्होंने अद्वैतवादी वैष्णवों की उपस्थिति में अपनी ही मां को दण्ड दिया।
 
Therefore he punished his own mother in the presence of Advaita Vaishnavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)