श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  2.22.126 
সকল-সর্বজ্ঞ-চূডামণি বিশ্বম্ভর
জানেন বিলম্বে হৈবেক বহুতর
सकल-सर्वज्ञ-चूडामणि विश्वम्भर
जानेन विलम्बे हैबेक बहुतर
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर सर्वज्ञ पुरुषों के शिखर रत्न हैं, अतः वे जानते थे कि और अधिक विलम्ब करने से ऐसे और भी अनेक लोग उत्पन्न होंगे।
 
Vishvambhara is the pinnacle of all-knowing men, so he knew that any further delay would result in the birth of many more such people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)