श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  2.22.123 
অদ্বৈতেরে গাইবেক ঽশ্রী-কৃষ্ণঽ বলিযা
যত কিছু বৈষ্ণবের বচন নিন্দিযা
अद्वैतेरे गाइबेक ऽश्री-कृष्णऽ बलिया
यत किछु वैष्णवेर वचन निन्दिया
 
 
अनुवाद
वे अद्वैत को “भगवान कृष्ण” के रूप में महिमामंडित करते थे और वैष्णवों के शब्दों की अवहेलना करते थे।
 
They glorified Advaita as “Lord Krishna” and disregarded the words of Vaishnavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)