श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.22.122 
ত্রিকাল জানেন প্রভু শ্রী-শচীনন্দন
জানেন,—সেবিবে অদ্বৈতেরে দুষ্ট-গণ
त्रिकाल जानेन प्रभु श्री-शचीनन्दन
जानेन,—सेविबे अद्वैतेरे दुष्ट-गण
 
 
अनुवाद
श्री शचीनंदन भूत, वर्तमान और भविष्य को जानते थे, इसलिए वे जानते थे कि कुछ दुष्ट लोग अद्वैत प्रभु की पूजा करेंगे।
 
Sri Sachinandan knew the past, present and future, so he knew that some evil people would worship Advaita Prabhu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)