श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 120
 
 
श्लोक  2.22.120 
চৈতন্য-সিṁহের আজ্ঞা করিযা লঙ্ঘন
না বুঝিঽ বৈষ্ণব নিন্দে পাইবে বন্ধন
चैतन्य-सिꣳहेर आज्ञा करिया लङ्घन
ना बुझिऽ वैष्णव निन्दे पाइबे बन्धन
 
 
अनुवाद
जो कोई भी वैष्णवों की निन्दा करके सिंह सदृश भगवान चैतन्य की आज्ञा का उल्लंघन करता है, उसे भवबन्धन भोगना पड़ता है।
 
Whoever disobeys the command of the lion-like Lord Chaitanya by criticizing the Vaishnavas has to suffer the bondage of material existence.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)