श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  2.22.112 
ছাডিযা সṁসার-সুখ প্রভু বিশ্বম্ভর
লক্ষ্মী পরিহরিঽ থাকে অদ্বৈতের ঘর
छाडिया सꣳसार-सुख प्रभु विश्वम्भर
लक्ष्मी परिहरिऽ थाके अद्वैतेर घर
 
 
अनुवाद
तब भगवान विश्वम्भर ने समस्त सांसारिक सुखों का परित्याग कर दिया। उन्होंने लक्ष्मी का साथ छोड़ दिया और अद्वैत के घर में अपना समय बिताया।
 
Lord Visvambhara then renounced all worldly pleasures. He left Lakshmi's company and spent his time in Advaita's home.
तात्पर्य
जबसे श्री गौराहरी ने अपनी पत्नी, लक्ष्मीदेवी की संगति छोड़ी, और अपना समय आदवैतः प्रभु के साथ बिताने लगे तब से शचीदेवी की आदवैत प्रभु के प्रति आसक्ति बढ़ने लगी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)