श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.22.10 
যে শচীর গর্ভে গৌরচন্দ্র-অবতার
বৈষ্ণবাপরাধ পূর্ব আছিল তাঙ্হার
ये शचीर गर्भे गौरचन्द्र-अवतार
वैष्णवापराध पूर्व आछिल ताङ्हार
 
 
अनुवाद
माता शची, जिनके गर्भ से गौरचन्द्र प्रकट हुए थे, ने एक बार एक वैष्णव के प्रति अपराध किया था।
 
Mother Shachi, from whose womb Gaurachandra was born, once committed a crime against a Vaishnava.
तात्पर्य
श्री गौरसुंदर की माता, सचिदेवी ने श्री अद्भूत प्रभु का अपमान किया था। जब तक उस अपराध का नाश नहीं हुआ, वह भगवान के प्रेम को प्राप्त नहीं कर पाईं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)