श्री गौरसुंदर की माता, सचिदेवी ने श्री अद्भूत प्रभु का अपमान किया था। जब तक उस अपराध का नाश नहीं हुआ, वह भगवान के प्रेम को प्राप्त नहीं कर पाईं।