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श्लोक 2.21.83  |
চৈতন্য-কথার আদি অন্ত নাহি জানি
যে-তে-মতে চৈতন্যের যশ সে বাখানি |
चैतन्य-कथार आदि अन्त नाहि जानि
ये-ते-मते चैतन्येर यश से वाखानि |
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| अनुवाद |
| मैं श्री चैतन्य से संबंधित विषयों का आदि या अंत नहीं जानता, फिर भी किसी न किसी प्रकार मैं उनकी महिमा का वर्णन कर रहा हूँ। |
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| I do not know the beginning or the end of the topics related to Sri Chaitanya, yet somehow or the other I am describing His glories. |
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