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श्लोक 2.21.79  |
চৈতন্যের দণ্ড যে মস্তকে করিঽ লয
সেই দণ্ড তারে প্রেম-ভক্তি-যোগ হয |
चैतन्येर दण्ड ये मस्तके करिऽ लय
सेइ दण्ड तारे प्रेम-भक्ति-योग हय |
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| अनुवाद |
| जो व्यक्ति भगवान चैतन्य के दण्ड को श्रद्धापूर्वक स्वीकार करता है, उसे परिणामस्वरूप परमानंद प्रेम की प्राप्ति होती है। |
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| One who accepts the punishment of Lord Chaitanya with devotion, as a result attains ecstatic love. |
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