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श्लोक 2.21.58  |
ভাগবত অধ্যাপনা করে নিরন্তর
আকুমার সন্ন্যাসীর প্রায ব্রতধর |
भागवत अध्यापना करे निरन्तर
आकुमार सन्न्यासीर प्राय व्रतधर |
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| अनुवाद |
| वे सदैव श्रीमद्भागवत का उपदेश देते थे। बचपन से ही उन्होंने संन्यासी जीवन जीने का व्रत ले रखा था। |
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| He always preached the Srimad Bhagavatam. From childhood, he had vowed to live a life of renunciation. |
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