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श्लोक 2.21.5  |
এক-দিন প্রভু করে নগর-ভ্রমণ
চারি-দিকে যত আপ্ত-ভাগবত-গণ |
एक-दिन प्रभु करे नगर-भ्रमण
चारि-दिके यत आप्त-भागवत-गण |
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| अनुवाद |
| एक दिन भगवान अपने अंतरंग भक्तों से घिरे हुए नवद्वीप में विचरण कर रहे थे। |
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| One day the Lord was wandering in Navadvipa surrounded by His intimate devotees. |
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