ভাগবতে অচিন্ত্য-ঈশ্বর-বুদ্ধি যার
সে জানযে ভাগবত-অর্থ ভক্তি-সার
भागवते अचिन्त्य-ईश्वर-बुद्धि यार
से जानये भागवत-अर्थ भक्ति-सार
अनुवाद
जो व्यक्ति श्रीमद्भागवत को अचिन्त्य परमेश्वर के रूप में स्वीकार करता है, वह जानता है कि शुद्ध भक्ति ही श्रीमद्भागवत का तात्पर्य है।
One who accepts Srimad Bhagavatam as the inconceivable Supreme Being knows that pure devotion is the meaning of Srimad Bhagavatam.
तात्पर्य
श्रीमद् भागवत के पाठ को साक्षात भगवान स्वरूप जानने वाले, जो श्रीमद् भागवतम को लौकिक नहीं मानते और जो लोग श्रीमद् भागवतम की शिक्षाओं के सहारे अपनी भौतिक बुद्धि को नियमित करते हैं वही लोग समझ सकते हैं कि भगवान की आराधना ही सब कुछ का सार है और श्रीमद् भागवतम में पढ़ाया गया जीवन का चरम लक्ष्य है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥