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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 91
श्लोक
2.20.91
কেহ মালসাট্ মারে পরম-উল্লাসে
ঽভালরে ঠাকুরঽ বলিঽ কেহ কেহ হাসে
केह मालसाट् मारे परम-उल्लासे
ऽभालरे ठाकुरऽ बलिऽ केह केह हासे
अनुवाद
किसी ने खुशी में उसकी बांहों और जांघों पर थपथपाया, और किसी ने मुस्कुराते हुए कहा, “प्रभु कितना महिमावान है।”
Someone patted his arms and thighs in joy, and someone smiled and said, “How glorious the Lord is.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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