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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 89
श्लोक
2.20.89
জয-হুলাহুলি দেয পতি-ব্রতা-গণ
মহাপ্রেমে ভক্ত সব করযে ক্রন্দন
जय-हुलाहुलि देय पति-व्रता-गण
महाप्रेमे भक्त सब करये क्रन्दन
अनुवाद
पतिव्रता स्त्रियों ने मंगल ध्वनि निकाली और सभी भक्तजन बड़े हर्ष से रो पड़े।
The devoted women made auspicious sounds and all the devotees wept with great joy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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