श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  2.20.74 
বিদ্যা-ধন-প্রতিষ্ঠায কিছুই না করে
বৈষ্ণবের প্রসাদে সে ভক্তি-ফল ধরে
विद्या-धन-प्रतिष्ठाय किछुइ ना करे
वैष्णवेर प्रसादे से भक्ति-फल धरे
 
 
अनुवाद
विद्या, धन और यश से कुछ भी प्राप्त नहीं होता। भक्ति का फल वैष्णवों की कृपा से प्राप्त होता है।
 
Knowledge, wealth, and fame do not achieve anything. The fruits of devotion are obtained through the grace of Vaishnavas.
तात्पर्य
जो लोगों की शिक्षा, धन, सुजात और कीर्ति से प्राप्त नहीं होता, वह वैष्णवों की कृपा से मुरा रि गुप्त जैसे भक्तों के सेवकों ने भी पा लिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)