श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.20.66 
প্রভু বলে,—“আরে বেটা জানিবি কেমনে?
ঽখাও খাওঽ বলিঽ অন্ন ফেলিলি যখনে
प्रभु बले,—“आरे बेटा जानिबि केमने?
ऽखाओ खाओऽ बलिऽ अन्न फेलिलि यखने
 
 
अनुवाद
प्रभु ने कहा, "मेरे प्यारे दोस्त, तुम्हें कैसे पता चलेगा? तुमने तो ज़मीन पर चावल फेंके और कहा, 'खाओ! खाओ!'
 
The Lord said, "My dear friend, how would you know? You threw rice on the ground and said, 'Eat! Eat!'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)