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श्लोक 2.20.53  |
আনন্দে মুরারি গুপ্ত ঘরেতে চলিলা
নিত্যানন্দ সঙ্গে প্রভু হৃদযে রহিলা |
आनन्दे मुरारि गुप्त घरेते चलिला
नित्यानन्द सङ्गे प्रभु हृदये रहिला |
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| अनुवाद |
| मुरारी गुप्त परमानंद में घर लौट आये, फिर भी भगवान नित्यानंद के साथ उनके हृदय में ही रहे। |
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| Murari returned home in secret ecstasy, yet remained with Lord Nityananda in his heart. |
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