श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  2.20.53 
আনন্দে মুরারি গুপ্ত ঘরেতে চলিলা
নিত্যানন্দ সঙ্গে প্রভু হৃদযে রহিলা
आनन्दे मुरारि गुप्त घरेते चलिला
नित्यानन्द सङ्गे प्रभु हृदये रहिला
 
 
अनुवाद
मुरारी गुप्त परमानंद में घर लौट आये, फिर भी भगवान नित्यानंद के साथ उनके हृदय में ही रहे।
 
Murari returned home in secret ecstasy, yet remained with Lord Nityananda in his heart.
तात्पर्य
महाप्रभु की कृपा पाकर मुेरारी गुप्ता अपने घर लौट गए। गौर-नित्यानंद उनके हृदय में विराजमान रहे। इस कथन की पुष्टि होती है कि, ''कृष्ण सदैव अपने भक्तों के हृदय में निवास करते हैं।''
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)