श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.20.5 
এক দিন মাহপ্রভু নিত্যানন্দ-সঙ্গে
শ্রীনিবাস-গৃহে বসিঽ আছে নানা-রঙ্গে
एक दिन माहप्रभु नित्यानन्द-सङ्गे
श्रीनिवास-गृहे वसिऽ आछे नाना-रङ्गे
 
 
अनुवाद
एक दिन महाप्रभु श्रीवास के घर में नित्यानंद की संगति का आनंद ले रहे थे।
 
One day Mahaprabhu was enjoying the company of Nityananda in the house of Srivasa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)