श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.20.28 
প্রভু বলে,—“মোর দাস মুরারি প্রধান”
এত বলিঽ চর্বিত তাম্বূল কৈলা দান
प्रभु बले,—“मोर दास मुरारि प्रधान”
एत बलिऽ चर्वित ताम्बूल कैला दान
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान ने कहा, "हे मुरारी, तुम मेरे सेवकों में सर्वश्रेष्ठ हो।" ऐसा कहकर भगवान ने मुरारी को अपना चबाया हुआ पान दिया।
 
Thereupon the Lord said, "O Murari, you are the best of my servants." Saying this, the Lord gave Murari the betel leaf he had chewed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)